Friday, February 23, 2018

हरिगीतिका छन्द - अरुण कुमार निगम

(1)
झन भूल के बरबाद कर,पानी हवै अमरित सहीं
सुन्ना रही दुनिया सरी, पानी बिना जिनगी नहीं ।
बिन झाड़ जंगल के कहाँ, बादर घुमड़ही तैं बता
सूरुज सदा तपते रही, बरसात होही लापता।

(2)
झन काट जंगल झाड़ ला, तज आज के तैं फायदा
देही प्रकृति हर डाँड़ जी, तोड़े कहूँ जे कायदा।
जब बाँचही पीढ़ी नहीं, पुरखा बलाही कोन जी
कतको इहाँ तैं जोर ले, नइ काम आही सोन जी।

(3)
रहि रहि इशारा हे करत, भूकम्प अउ अंकाल मन
हल्का समझ के बात ला, तैं काल ऊपर टाल झन ।
पानी बचा पौधा लगा, खुरपी कुदारी साज ले
पीढ़ी बचाये के जतन, तैं कर शुरू बस आज ले ।।

रचनाकार - अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़ 

22 comments:

  1. जय जोहार गुरुजी बढ़िया भाव वाला छन्द

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  2. वाह गुरुदेव बहुत सुन्दर हरिगीतिका छंद

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  3. पानी के महत्तम बतावत पर्यावरण बचाय के सुग्घर मुहिम गुरुदेव हरिगीतिका छंद के माध्यम ले

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  4. पानी के महत्तम बतावत पर्यावरण बचाय के सुग्घर मुहिम गुरुदेव हरिगीतिका छंद के माध्यम ले

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  5. पानी के महत्ता के साथ पेड़ अउ पर्यावरण के संरक्षण बर सुघ्घर रचना

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  6. पानी के महत्ता के साथ पेड़ अउ पर्यावरण के संरक्षण बर सुघ्घर रचना

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  9. अब देश हो सबले बडे, नभ देश मा ध्वज ला धरौ
    पर देश मा रह लव भले, निज देश के सुरता करौ।
    नव यान ले नव गान ले, नव ग्यान ले कोठी भरौ
    परि आवरण अनुदान ले, सुन देश के दुख ला हरौ।

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  10. बहुत सुघ्घर गुरुदेव..

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  11. बहुते सुघ्घर सृजन भाव हे गुरुदेव।
    सादर नमन

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  12. वाह वाह लाजवाब हरिगीतिका छंद हे गुरुदेव। सादर प्रणाम।

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  13. बहुत सुघ्घर हरिगीतिका छंद लिखे हव गुरुदेव सादर पायलगी।

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  14. पानी जंगल ला बचा, बचही तोर परान।
    गुरू बचन बिरथा नहीं, इही आज के ग्यान।।

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  15. पानी जंगल ला बचा, बचही तोर परान।
    गुरू बचन बिरथा नहीं, इही आज के ग्यान।।

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  16. बड़ सुघ्घर रचना गुरूदेव... सुग्घर संदेश
    🙏🙏🙏

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  17. सही बात लिखेव गुरुदेव । पानी ला बचाना बहुत जरूरी हे ।
    सुंदर रचना बहुत बहुत बधाई

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  18. वाह्ह्ह् वाह्ह्ह् गुरुदेव।लाजवाब सृजन।सादर बधाई

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  19. वाह्ह्ह् वाह्ह्ह् गुरुदेव।लाजवाब सृजन।सादर बधाई

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  20. अनुपम अउ अनुकरणीय हरिगीतिका छंद के सृजन करे हव,गुरुदेव। सादर नमन।

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  21. अद्वितीय गुरुदेव

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  22. पानी बिन झाडी कहाँ,बिन झाडी पानी कहाँ।
    सुग्घर छंद गुरुदेव।

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