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Tuesday, September 8, 2026

शंकर छंद- संत गुरु घासीदास

 शंकर छंद- संत गुरु घासीदास 


जग मा सत के अलख जगाये, संत घासीदास।

ढोंग रूढ़ि पाखंड मिटाये, अउ मिटाये त्रास।।

बँटे रहिस जब जाति-पाति अउ, धरम मा इंसान।

मनखे ला मनखे के असली, दिये तब पहिचान।।


करे एकजुट गुरु आंदोलन, चला के सतनाम।

सत्य प्रतीक गड़ाये बाबा, सेत जोड़ा खाम।।

फहर-फहर सादा के झंडा, सुमत के फहराय।

छत्तीसगढ़ पावन माटी मा, जनम धर गुरु आय।।


दीन-हीन के बने मसीहा, करे दुख ला दूर।

करत रहिन जब सामंती मन, जिये बर मजबूर।।

नारी के उत्थान करे अउ, दिलाये अधिकार।

गजानंद कर जोर करत हे, तोर जय जयकार।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)20/08/2026

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