कमरछट-कुण्डलिया
महतारी मन आज तो, रहिथें सुघर उपास।
बेटा-बेटी खुश रहय, माँगँय वर जी खास।
माँगँय वर जी खास, उमर लइकन के बाढ़य।
पोती मारय मूड़, कहूँ विपदा झन माढ़य।
एक ठउर सकलाय, हाथ मा लेके थारी।
महादेव ला पूज, फूल चढ़ाँय महतारी।।
विजेन्द्र कुमार वर्मा
नगरगाँव (धरसीवांँ)
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