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Tuesday, September 8, 2026

सरसी छंद गीत- *शान बढ़य भारत भुइँया के*

 सरसी छंद गीत- *शान बढ़य भारत भुइँया के*


तीन रंग मा सजे तिरंगा, देवत हे संदेश।

शान बढ़य भारत भुइँया के, सुग्घर हो परिवेश।।


तान खड़े हें सीना सेना, सरहद मा दिन रात।

सरदी गरमी धूप ठंड हो, या चाहे बरसात।।

देश सुरक्षा खातिर सहिथें, वीर सिपाही क्लेश।

शान बढ़य भारत भुइँया के, सुग्घर हो परिवेश।।1


रीति नीति संस्कार सिखावय, गीता ग्रन्थ कुरान।

अनेकता मा बसे एकता, भारत के पहिचान।।

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई, रखँय नहीं मन द्वेष।

शान बढ़य भारत भुइँया के, सुग्घर हो परिवेश।।2


ये भुइँया के भाग जगावय, माटी पूत किसान।

गार पसीना अन्न उगावय, करथे कर्म महान।।

जग के पालनहार ल देवव, आशीर्वाद अशेष।

शान बढ़य भारत भुइँया के, सुग्घर हो परिवेश।।3


इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/08/2023

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