शंकर छंद- *भारत माँ के वीर लाड़ला*
दिये हवँय जी वीर सिपाही, देश खातिर जान।
नाम अमर दुनिया मा होगे, मिलत हे सम्मान।।
बहा लहू के कतरा-कतरा, भरिन हें हुंकार।
उँखरे खातिर आजादी के, मिले हे अधिकार।।
भारत माँ के वीर लाड़ला, नमन हे सौ बार।
कइसे चुका भला हम पाबो, तुँहर जी उपकार।।
लौट दुबारा फिर आ जावव, मचे हाहाकार।
छुपे हवँय बहरुपिया बनके, देश मा गद्दार।।
संविधान मा वार करत हें, रखे कुंठित सोच।
सजे सिंहासन स्वारथ के हे, देश खाहीं नोच।।
मँडरावत हे खतरा फिर से, हमर भारत देश।
हलाकान हें आम लोग सब, दुभर हे परिवेश।।
✍🏻 इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)14/08/2026
No comments:
Post a Comment