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Tuesday, September 8, 2026

कज्जल छंद- गुरु हे सूरज के समान

 कज्जल छंद- गुरु हे सूरज के समान


पाँच सितंबर दिन महान।

रहिथे शिक्षक दिवस जान।

पाथें गुरु सम्मान-मान

होथे गुरुवर ज्ञान खान।।


गुरु गीता अउ गुरु कुरान।

वेद बाइबिल ग्रँथ पुरान।

गुरु हे सूरज के समान।

कहिथें सुन लौ सब सुजान।।


होथे गुरु के कई रूप।

जेकर महिमा हे अनूप।

कभू ददा-दाई स्वरूप।

ले हरथे तकलीफ धूप।।


करय नहीं गुरु भेद-भाव।

एक समान रखे लगाव।

होथे गुरु मझधार-नाव।

जग के हित बर दै सुझाव।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)05/09/2026

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