शिक्षा-जयकारी छंद
आखर-आखर के धर ज्ञान I
पढ़बे लिखबे मिलही मान II
शिक्षा जिनगी के आधार I
अनपढ़ के जीवन बेकार II
रंग रूप के का हे काम I
ग्यानी धानी के हे नाम II
विनय बुद्धि हे जेकर पास I
छूथे भइया उही अगास II
शिक्षा बनथे जी हथियार I
कुरुति मा तो करे प्रहार II
नव चेतन मन मा भर जाय I
सही गलत के राह दिखाय II
ऊँच-नीच मा फरक मिटाय I
मानवता के राह दिखाय II
शिक्षा के जब जले मशाल I
जीवन सबके बड़ खुशहाल II
भटके मन ला राह दिखाय I
अन्धकार ला दूर भगाय II
ज्ञान-जोत के शिक्षा पाय I
तभ्भे जिनगी बड़ ममहाय II
विजेन्द्र कुमार वर्मा
नगरगाँव धरसीवांँ
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