Monday, September 18, 2017

हरिगीतिका छंद - श्री मनीराम साहू

हरिगीतिका छंद - श्री मनीराम साहू

(1)
तैं नइ थकच तैं नइ रुकच,रइथच गड़े गा खेत तैं
दिनभर अँड़े जम्मो बुता,करथच लगाके चेत तैं।
तोला कहयँ दाता सबो,धरती म हच भगवान तैं।
परमारथी हच देंवता,रखथच सबो के ध्यान तैं।

(2)
भोले भला करथच तहीं,दाता तहीं संसार के।
देथच सबो सुख ला ग तैं,झोली भरे दुख टार के।
आये हववँ महुँ हा शरन,पूरो बबा तैं आस ला।
हँव मैं भजत तोला जपत,झन टोरबे बिस्वास ला।

(3)
छिन-छिन जपव हिरदे रखव, दसरथ तनय अवधेश ला।
श्री राम जी हा मेटही,जम्मो हमर कल्लेश ला।
दाता उही दुख सब हरय ,जग जीव पालनहार हे।
भव ले लगाही पार वो,बस नाम ओकर सार हे।

(4)
बंशी बजावय मोहना,बइठे कदम के डार मा।
सुन तान आवयँ गोपिका,जमुना नदी के पार मा।
सुध-बुध भुलयँ अउ झूम जयँ,धुन मा सबो रम जायँ जी।
बिनती करयँ कर जोर के,सरलुग खड़े बजवायँ जी।

रचनाकार - श्री मनीराम साहू

17 comments:

  1. बहुते सुघ्घर हरिगीतिका छंद के सृजन हे भाई मनी
    बहुत बहुत बधाई

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  2. वाह्ह भैया।सुन्दर लेखनी ल नमन।बहुत बहुत बधाई।

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  3. बहुत बढ़िया रचना मनी भाई

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  4. गुरुदेव ला सादर पयलगी अउ आप सबला अंतस ले धन्यवाद

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  5. अलग अलग भाव उपर आधारित शानदार हरिगीतिका बधाई ।रचनाकार मनी राम साहू जी को कोटिशः बधाई ।

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  6. बहुत ही शानदार हरिगीतिका छंद भैया।बधाई अउ शुभकामना

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  7. बधाई।बहुत बढ़िया हरिगीतिका छंद सृजन करे हव मनीराम जी।।

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  8. बधाई।बहुत बढ़िया हरिगीतिका छंद सृजन करे हव मनीराम जी।।

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  9. वाह मितान जी आनन्द आगे

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  10. वाह मितान जी आनन्द आगे

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  11. बधाई साहू जी सुग्घर हरिगीतिका।वाह

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  12. बहुत सुग्घर सृजन सर।सादर बधाई

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  13. भगवान एती मानथन पर ख्याल ओकर नइ करन।
    जानके घर के समस्या ध्यान ओकर नइ रखन।।
    लद जथे करजा मा जानव फेर हो जाथे मरन।
    टँग जथे फाँसी म भैया देखके हम चुप रथन।।

    बहुत सुंदर रचना मनीराम जी....सादर बधाई

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  14. वाह्ह्ह्ह्ह् भइया बड़ सुग्घर हरिगीतिका

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  15. सुघ्घर रचना बर बधाई भैया।।

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  16. मनी भईया सुघ्घर , बधाई हो

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