Followers

Wednesday, December 18, 2019

बाबा गुरु घासीदास जयंती विशेषांक - सन् 2019


🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
(1) बरवै छन्द - बोधनराम निषादराज
(गुरु घासीदास)

बंदँव  गुरुवर  बाबा, घासीदास।
सुन  लेहू जी मोरो, हे अरदास।।

मँय   अज्ञानी   देदे, मोला   ज्ञान।
ददा मोर तँय दाई,अउ भगवान।।

तोर चरन मा जम्मों,सुख ला पाँव।
बाबा मँय तो तोरे, गुन  ला गाँव।।

माता  अमरौतिन  हा,पावय भाग।
बाबा मँहगू  के हे, किस्मत  जाग।

पावन माह दिसम्बर, देखव आय।
अब गिरौदपुर वासी,धज लहराय।।

सत्   रद्दा देखाइस, बाबा  आज।
आवव संगी चलबो,करबो काज।।

छंदकार-बोधन राम निषादराज
सहसपुर लोहारा,जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(2) दोहा छन्द - अशोक धीवर जलक्षत्री
(बाबा घासीदास जी ला सादर)

मँहगू के लाला हरे, अमरौतिन के पूत।
घासी नाम धराय हे, सत्यनाम के दूत।।१।।
सदगुरु घासी दास के, हे संदेश महान।
जे ला सुख के आस हे, धर लँय ओकर ज्ञान।।२।।
मनखे मनखे एक हे, बोले घासी दास।
सत के जोत जलाय के, जग मा होगे खास।।३।।
मानव ओकर बात ला, बनिहौ सबो महान।
भेदभाव हिंसा मिटै, होही सुखी जहान।।४।।
झूठ - लबारी बोल के, जग ला झन दव मात।
निंदा चारी ले बचव, मानौ गुरु के बात।।५।।
कोनो मनखे माँस ला, मार जीव झन खाव।
गाँजा दारू भाँग ला,पी के झन इतराव।।६।।
पर नारी माता समझ, नेक नियत ले देख।
सबो जीव बर कर दया, सब ला एक सरेख।।७।।
सती प्रथा ला टोर के, विधवा करिन बिहाव।
मूर्ति पूजा बंद कर, पूजिस अंतस भाव।।८।।
जैतखाम पूजा करव, सत के जोत जलाय।
सादा जीवन जीव बर, रद्दा सुघर बताय।।९।।
सत के रद्दा जेन भी, चलही मनखे जात।
दुख दारिद मिट जाय जी, सिरतो कइथौं बात।।१०।।
सत के रद्दा जे चलय, सतनामी कहलाय।
गुरू बचन नइ मानही, सतनामी वो काय।।११।।
"जलक्षत्री" हा पार ला, बाबा के नइ पाय।
देव समझ के पूज लँय, पाछू झन पछिताय।।१२।।

छंदकार - अशोक धीवर "जलक्षत्री"
ग्राम - तुलसी (तिल्दा नेवरा)
जिला - रायपुर (छत्तीसगढ़)
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(3) चौपाई छंद - श्लेष चन्द्राकर
विषय - गुरु घासीदास जयंती

संत शिरोमणि घासी बाबा। कहय एक हे कांशी-काबा।।
जात-पात ला ओ नइ जानय। एक सबो मनखे ला मानय।।

गुरु बाबा के हरय जनम दिन, सुरता रखहूँ येला सबझिन।।
बगराना हे पबरित बानी। सुना सबो ला उँखर कहानी।।

बानी मा मँदरस घोलय गा। संत बबा सुग्घर बोलय गा।।
सदा नीक ओ गोठ किहिस हे। सत के पहरादार रिहिस हे।।

सच्चा सेवक ओ ईश्वर के। रिहिस विरोधी आडंबर के।।
इहाँ पंथ सतनाम चलाइन। मानवता के पाठ पढ़ाइन।।

भेदभाव सब छोड़व बोलिन। मनखे मन के आँखी खोलिन।।
छुआछूत ला रोग बताये। दीन-दुखी ला गला लगाये।।

एक असन ओ सबला मानय। मया सबो ला देबर जानय।।
मानवता के नेक पुजारी। रिहिस बबा के महिमा भारी।।

छंदकार - श्लेष चन्द्राकर,
पता - खैरा बाड़ा, गुड़रु पारा, महासमुन्द (छत्तीसगढ़)
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

बरवै छंद - आशा देशमुख

गुरू महिमा

अमरौतिन के कोरा ,खेले लाल।
महँगू के जिनगी ला ,करे निहाल।1।

सत हा जइसे चोला ,धरके आय।
ये जग मा गुरु घासी ,नाम कहाय।2।

सत्य नाम धारी गुरु ,घासीदास।
आज जनम दिन आये ,हे उल्लास।3।

मनखे मनखे हावय ,एक समान।
ये सन्देश दिए हे, गुरु गुनखान।4।

देव लोक कस पावन ,पुरी गिरौद।
सत्य समाधि लगावय ,धरती गोद।5।

जैतखाम  के महिमा ,काय बताँव।
येला जानव भैया ,सत के ठाँव।6।

निर्मल रखव आचरण ,नम व्यवहार।
जीवन हो सादा अउ ,उच्च विचार।7।

बिन दीया बिन बाती ,जोत जलाय।
गुरु अंतस अँंधियारी ,दूर भगाय।8।

अंतस करथे उज्जर ,गुरु के नाम।
पावन पबरित सुघ्घर ,गुरु के धाम।9।

आशा देशमुख
एनटीपीसी कोरबा, छत्तीसगढ़
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(5) आल्हा छन्द - जीतेन्द्र वर्मा "खैरझिटिया"
               बाबा घासीदास

हमर राज के  माटी मा जी,घासी दास लिये अवतार।
सत के सादा झंडा धरके,रीत नीत ला दिये सुधार।

जात पात अउ छुआ छूत बर, खुदे बनिस बाबा हथियार।
जग के खातिर अपने सुख ला,बाबा घासी दिये बिसार।

रूढ़िवाद ला मेटे खातिर,गुरू करिस बढ़ चढ़ के काम।
हमर राज के कण कण मा जी,बसे हवे घासी के नाम।

बानी मा नित मिश्री घोरे,धरम करम के अलख जगाय।
मनखे मनखे एक बता के,सुम्मत के रद्दा देखाय।

संत हंस कस उज्जर चोला,गूढ़ ग्यान के गुरुवर खान।
अँवरा धँवरा पेड़ तरी मा,बाँटे सबला सत के ज्ञान।

जंगल झाड़ी ठिहा ठिकाना,बघवा भलवा घलो मितान।
धरे कमंडल मा गंगा ला,बाबा लेवय जब कुछु ठान।

झूठ बसे झन मुँह मा कखरो,झन खावव जी मदिरा माँस।
बाबा घासी जग ला बोले,करम करव निक जी नित हाँस।

दुखिया मनके बनव सहारा,मया बढ़ा लौ बध लौ मीत।
मनखे मनखे काबर लड़ना,गावव सब झन मिलके  गीत।

सत के ध्वजा सदा लहरावय,सदा रहे घासी के नाँव।
जेखर बानी अमरित घोरे,ओखर मैं महिमा ला गाँव।

जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा), छत्तीसगढ़
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(6) दोहा छन्द - कन्हैया साहू "अमित"
             हे गुरु घासीदास

1-पायलगी तोला बबा, हे गुरु घासीदास।
मन अँधियारी मेट के, अंतस भरव उजास।।

2-सतगुरु घासीदास हा, मानिन सत ला सार।
बेवहार सत आचरन, सत हे असल अधार।।

3-भेदभाव बिरथा हवय, गुरु के गुनव गियान।
जात धरम सब एक हे, मनखे एक समान।।

4-झूठ लबारी छोड़ के, बोलव जय सतनाम।
आडंबर हे बाहरी, अंतस गुरु के धाम।।

5-चोरी हतिया अउ जुआ, सब जी के जंजाल।
नारी अतियाचार हा, अपन हाथ मा काल।।

6-जउँहर जेवन माँस के, घटिया नशा शराब।
मानुस तन अनमोल हे, झनकर जनम खराब।।

7-मुरती पूजा झन करव, पोसव बइला गाय।
पशुसेवा सत आसरा, जिनगी सफल बनाय।।

8-एती-तेती झन भटक, सत के रद्दा सोज।
सत मारग भगवान के, हिरदे भीतर खोज।।

9-सदा रखव सब सादगी, तन-मन के ए शान।
सादा जीवन ला अमित, गुरु के सेवा जान।।

10-पंथी सत के बन अमित,गुरु ले कर गोहार।
भूलचूक करही छमा,सतगुरु जय जोहार।।

छन्दकार / कन्हैया साहू "अमित"
शिक्षक~भाटापारा (छ.ग.)
संपर्क~9200252055
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(7) सार छंद- इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

माह दिसम्बर परब सुहावन,गुरु घासी के आगे।
मन मा सबके खुशियाँ छागे, अँगना द्वार लिपागे।।1

बाबा गुरु के बानी गूँजय,मंगल पंथी चौका।
बड़ नसीब मा मिलथे संतो,अइसन पावन मौका।।2

सजे हवय सत जोड़ा खम्भा,अमर नाम सत बोली।
गुरु बाबा के महिमा गाये,सजगे पंथी टोली।।3

झांझ मृदंगा मांदर साजे,गाये बर गुरु गाना।
पाँव बँधे हे घुँघरू सँग मा,ले के सतगुरु बाना।।4

सजे जनेऊ कंठी माला,माथा चंदन सादा।
सेत धजा ला जग फहराबो, आवव कर लिन वादा।।5

इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छ.ग.)
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(8) हरिगीतिका छंद - विरेन्द्र कुमार साहू

         गुरु घासीदास

पाये हवन  सद्ज्ञान के , भंडार हम अब्बड़ अकन।
लागा हवय तोरे बबा , ओला भुलाये नइ सकन।
जन ला उबारे बर करे , तँय पंथ शुभ सतनाम शुरु।
छत्तीसगढ़ के देंवता , जोहार घासीदास गुरु।।

छंदकार - विरेन्द्र कुमार साहू , बोड़राबाँधा (पांडुका) , जिला - गरियाबंद (छ.ग.) 492109 मो. - 9993690899
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(9) कुंडलिया छन्द - नमेंद्र कुमार गजेंद्र
             जय सतनाम

घासी बाबा नाम ले , बन जाथे सब काम।
जेकर जीवन ज्ञान के , प्रेम भरे हे दाम।।
प्रेम भरे हे दाम , भाव जे सत सत होही।
सत बानी अनमोल , सुने ते उफला पोही।।
गुरु के कर अपमान,लगावव झन खुद फाँसी।
भव ले करही पार , हमर गुरु बाबा घासी *।।1।।*

मानव मानव एक हे , बाबा देहे ज्ञान।
भेद भाव हे जात के , सबके लहू समान।।
सबके लहू समान , देह सुग्घर हे जानव।
पूजा सेवा भाव , करम सत मनवा मानव।।
देखत दुख मा जीव,बनो झन बैरी दानव।
छलकत आँसू पोंछ , बनव ये जग के मानव *।।2।।*

घूमत जग अब छोड़ चल,बाबा तीरथ धाम।
धर ले चोला गोड़ ला,बोलत जय सतनाम।।
बोलत जय सतनाम ,बबा के रद्दा धरिहव।
मिलही संगी छाँव ,विनय बाबा ले करिहव।
तिलक लगालव माथ ,धजा घासी के चूमत।
घासी जग आधार , कार हस फोकट घूमत *।।3।।*

छंदकार-नेमेन्द्र कुमार गजेन्द्र
हल्दी-गुंडरदेही,बालोद
मोबा.8225912350
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(10) कुण्डलियाँ छंद - कौशल कुमार साहू

गुरु घाँसी ला तैं सुमर,महिमा अपरम्पार।
धन दौलत जावय नहीं, सतनाम हे सार।।
सतनाम हे सार ,साँझ अउ बिहना जपलव।
सँउहे घर भगवान, ददा दाई ला भजलव।।
झन जा तीरथ धाम, कहूँ तैं मथुरा काँशी ।
बेड़ा पार लगाय ,हमर सबके गुरु घाँसी।।

छन्दकार - कौशल कुमार साहू
भाटापारा छत्तीसगढ़
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(11) कुण्डलिया छंद- इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

सतगुरु तोरे द्वार मा,बिनती हे करजोर।
देहू शुभ आशीष ला,जिनगी मा नवभोर।।
जिनगी मा नवभोर,भाग के चमकय तारा।
संकट करिहौ दूर,हवव गुरु आप सहारा।।
गजानन्द कर ध्यान,कहे बड़ किस्मत मोरे।
सतगुरु घासीदास,हवँव मैं चेला तोरे।।1

बंदन हे कर जोर गुरु,बनिहौ आप सहाय।
बीच भँवर मा नाव हे,देहू पार लगाय।।
देहू पार लगाय,हवन हम तोर सहारा।
हो जिनगी बलिहार,सदा परहित उपकारा।।
सतनामी पहिचान,जनेऊ सादा चंदन।
गजानन्द कविराज,करय सतगुरु ला बंदन।।2

चलव जलाबो मिल सबो,एक  दीप सतनाम।
माह दिसंबर पर्व गुरु,सत सत नमन प्रणाम।।
सत सत नमन प्रणाम,करँव मँय सत अवतारी।
जिनगी के हर सांस,चरण  सतगुरु बलिहारी।।
गजानन्द कविराय,कहे बन सत दीप जलव।
महूँ चलत हँव साथ,सबो मिलके साथ चलव।।3

मन भावन सुर ताल मा,गा लौ महिमा गीत।
गुरु बाबा के ज्ञान हा,लेथे मन ला जीत।।
लेथे मन ला जीत,सत्य के राह दिखाथे।
सेत खाम मा सेत,धजा सत के लहराथे।।
गजानन्द धर ध्यान,चरण रज गुरु के पावन।
माह दिसम्बर पर्व,जयंती गुरु मन भावन।।4

इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छ.ग.)
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(12) मनहरण घनाक्षरी - इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

       गुरु घासीदास जी के 42 अमृतवानियाँ

सतनाम घट घट,बसे हवै मन पट
भरौ ज्ञान पनघट,कहे घासीदास हे
सबो संत मोरे आव,महिनत रोटी खाव
जिनगी सुफल पाव,करम विश्वास हे
ओतकेच तोर पीरा,जतकेच मोर पीरा
लोभ मोह क्रोध कीरा,करे तन नाश हे
सेवा कर दीन दुखी,दाई ददा रख सुखी
धर ज्ञान गुरुमुखी,घट देव वास हे।।

ऊँचा पीढ़ा बैरी बर,मया बंधना ला धर
अन्याय विरोध बर,रहौ सीना तान के
निंदा अउ चारि हरे,घर के उजार करे
रहौ दया मया धरे,कहना सुजान के
झगरा ना जड़ होय,ओखी के तो खोखी होय
सच ला ना आँच आय,मान ले तैं जान के
धन ला उड़ाव झन,खरचा बढ़ाव झन
काँटा ला गढ़ाव झन,पाँव अनजान के।।

पानी पीयव छान के,बनावौ गुरु जान के
पहुना संत मान के,आसन लगाव जी
सगा के हे सगा बैरी,सगा होथे चना खैरी
अटके हे देख नरी,सगा का बताँव जी
मोला देख तोला देख,बेरा ग कुबेरा देख
कर सबो के सरेख,मिल बाँट खाव जी
मोर हर संत बर,तोर हीरा मोर बर
हे कीरा के बरोबर,मैं तो समझाँव जी।।

दाई हा तो दाई आय,मया कोरा बरसाय
दूध झन निकराय,मुरही जी गाय के
गाय भैंस नाँगर मा,इखर गा जाँगर मा
ना रख हल गर मा,नोहय फँदाय के
नारी के सम्मान बर,विधवा बिहाव बर
रीत नवा चालू कर,चूरी पहिराय के
पितर मनई लगे,मरे दाई ददा ठगे
जीयत मा दूर भगे,मोह बइहाय के।।

सोवै तेन सब खोवै,जागै तेन सब पावै
सब्र फल मीठा होवै,चख चख खाव जी
रोस भरम त्याग के,सोये नींद जाग के
ये धरती के भाग ला,खूब सिरजाव जी
कारन ला जाने बिना,झन न्याय ला जी सुना
ज्ञान रसदा ना कभू,उरभट पाव जी
मन ला हे हार जीत,बाँटौ जग मया प्रीत
फिर सब मिल गीत,सुमता के गाव जी।।

दान  देवइया पापी,दान लेवइया पापी
भक्ति भर मन झाँपी,मूर्ति पूजा छोड़ दे
जइसे खाबे अन्न ला,वइसे पाबे मन ला
सजा झन ये तन ला,मोह घड़ा फोड़ दे
ये मस्जिद मन्दिर,चर्च अउ संतद्वार
बना झन गा बेकार,मन सेवा  मोड़ दे
गरीब बर निवाला,तरिया  धरमशाला
बना कुआँ पाठशाला,हित ईंट जोड़ दे।।

आँख होय जब चूक,अँगरा कस जस लूख
फोकट के सुख करे,जिनगी ला राख हे
पर के भरोसा झन,खा तीन परोसा झन
मास मद बसौ झन,नाश के सलाख हे
एक धूवा मारे तेनो,खुदे बराबर जानौ
जान के मरई सुनौ,पाप के तो शाख़ हे
गुरु घासीदास कहे,कहौ झन मोला बड़े
सत सूर्य चाँद खड़े,उजियारी पाख हे।।

छंदकार- इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छ.ग.)
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(13) मनहरण धनाक्षरी-छंद  - केवरा मीरा यदु

सत्य नाम के दूत जी,अमरौतिन पूत जी ।
मंहगू के लाला वोहा, बाबा घासी दास हे ।
दुरिया लबारी रहो,माँ पर सुवारी कहो ।
सुघ्घर संदेश वोहा, जग ला बताय हे ।।
मनखे सबो एक हे, गोठ बने नेक हे ।
सत के रसता चलो,कहि समझाय हे ।।
झूठ लबारी छोड़व, सच से नाता जोड़व ।
सत के दिया सुग्घर, बाबा हा जलाय हे ।।

चारी निंदा ला छोड़व,मास मदिरा ना खावव ।।
सती प्रथा ला टोरव,बने समझाय हे ।।
बिना तेल दिया बारे, सबके जिया उबारे ।
मंहगू के लाला देखो, अलख जगाय हे ।।
छाता पहाड़ धुनी, रमाये बनके मुनी ।
गुरू कहवाये बाबा, पंथ ला चलाय हे ।।
गिरौद पुरी धाम हे, महिमा हा महान हे ।
अमृत बरसाय  हे, मनखे तराय हे।।

छंदकारा - केवरा यदु"मीरा "
राजिम छत्तीसगढ़
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(14) कुंडलिया छंद- मनीराम साहू मितान

जप ले गुरु के नाम ला,भज ले तैं सतनाम।
हाबय गा घासी बबा,जम्मो सुख के धाम।
जम्मो सुख के धाम, सत्य के धर ले रस्ता।
उही लगाही पार, सोच झन मँहगा सस्ता।
होही गा कल्यान, बुता तैं कर ले टप ले।
सुग्घर पावन नाम, बबा घासी ला जप ले।

जिनगानी ला कर सुफल, धर ले गुरु सन्देश ।
कहत हँव सिरतोन मैं, मिटही सब कल्लेश।
मिटही सब कल्लेश,टार तैं  मन के काँकर।
समता अउ सद्भाव, बाँट कर छाती चाकर।
सुम्मत मंतर जान, मीठ जी गुरु के बानी।
बहा मया के धार, सुफल कर ले जिनगानी।

छंदकार- मनीराम साहू 'मितान'
कचलोन( सिमगा) जिला- बलौदाबाजार भाटापारा
छत्तीसगढ़
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(15) सरसी छंद-श्री सुखदेव सिंह'अहिलेश्वर'

सतगुरु बाबा मोर

हे गुरु घासी घट-घट वासी,सतगुरु बाबा मोर।
जुग जिनगी ला सत्य धरादे,अरजी हे कर जोर।

जुग-जुग ले हंसा भटकत हे,इँहें पाँच ठन तत मा।
छोर सकय चौरासी बँधना,गुरु बिन कोन जगत मा।

मोक्ष मुक्ति के खोज म हंसा,दउँड़य रट्टा-टोर।
हे गुरु घासी घट-घट वासी,सतगुरु बाबा मोर।

जात-धरम के झगरा सरलग आत रथे दुनिया मा।
ठग-ठग के बुधियार परानी खात रथे दुनिया मा।

करहु कृपा मुक्का बइठे हा,कण्ठ अपन लै फोर।
हे गुरु घासी घट-घट वासी,सतगुरु बाबा मोर।

ज्ञान समझ सुमता भटकत हे,ए पारा ओ पारा।
धरम करम के बीच भँवर मा,फँसगे भाईचारा।

जग ब्यापे हे अहं अँधियरिया,करदे सत के भोर।
हे गुरु घासी घट-घट वासी,सतगुरु बाबा मोर।

हे अविनाशी तुँहर चरण मा,लहरावत हे गंगा।
ज्ञान पिपासु ज्ञान अमृत ला,पावत हें मुह-मंगा।

शब्द सुमन धर द्वार खड़े हे,ये सुखदेव अँजोर।
हे गुरु घासी घट घट वासी,सतगुरु बाबा मोर।

रचना-सुखदेव सिंह'अहिलेश्वर'
गोरखपुर कबीरधाम छत्तीसगढ़
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(16) अमृतध्वनि छन्द -  दिलीप कुमार वर्मा

रसता बने बताय हे,बाबा घासी दास।
जे मनखे चल देख थे, जिनगी होथे खास।
जिनगी होथे,खास खास जी,मन हरसाथे।
पापी मनवा,सत मारग के,रसता पाथे।
कहना मानव,मानव जीवन,नइ हे ससता।
भारी मुसकिल, चलना होथे ,सत के रसता।

आवव बाबा आज फिर, ले के अउ अवतार।
पापी बाढ़े हे इहाँ, मनखे गय सब हार।
मनखे गय सब,हार मान के,बइठे हावय।  
अत्याचारी,मनखे देखव,मुड़ी उठावय।
सत के रसता,लेगे खातिर,राह बतावव।
नइ मानत हे,अब के मनखे,जल्दी आवव।

जेला छोड़े बर कहे,धरे इहाँ सब लोग।
मानत नइ हावय इहाँ,करत हवय सब भोग।
करत हवय सब,भोग रोग ला,धर घर लावय।  
मास खाय के,मदिरा पीवय, शोर मचावय।
बाबा घासी,रसता लादे,भटके तेला।  
जम्मो मनखे,मदिरा छोड़य, पी थे जेला।

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(17) कुंडलिया छंद - मीता अग्रवाल

माला ला गर मा धरे ,बाबा घासीदास ।
अलख जगाइन सत्य    के,छत्तीसगढ़ मा खास।
छत्तीसगढ़ मा खास, देख लो जैता खामे ।
बाबा के संदेश,गुनो जी गिरौद ग्रामे ।
पंथ सुगम अपनाव, सत्य के राह ज्वाला।
महिमा हवे महान,कंठ मा  चंदन माला।

सत के रद्दा मा चलिन ,अमरौतिन के लाल।
महँगू के घर धन्य हे,देखिस घासी बाल।
देखिस घासी बाल,ज्ञान तप  ले ये पाना ।
जात पात के भेद,मेट के सुमता लाना।
आनी बानी फेर,जीव जी भटके जतके।
मिटय सबो जी क्लेश,धरव जी  मारग सतके।

छंदकार -मीता अग्रवाल मधुर रायपुर छत्तीसगढ़
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(18) रोला छन्द - अरुण कुमार निगम

मनखे मनखे एक, इही हे सुख के मन्तर
जिहाँ नहीं हे भेद, उहीं असली जन-तन्तर
बाबा घासी दास, हमन ला इही बताइन
जग ला दे के ज्ञान, बने रद्दा देखाइन ।।

जिनगी के दिन चार, नसा पानी ला त्यागौ
दौलत माया जाल, दूर एखर ले भागौ।
जात-पात ला छोड़, सबो ला मनखे जानौ
बोलव जय सतनाम, अपन कीमत पहिचानौ।।

काम क्रोध मद मोह, बुराई लाथे भाई
मिहनत करके खाव, इही हे असल कमाई
सत्य अहिंसा प्रेम, दया करुणा रख जीयव
गुरु के सुग्घर गोठ, मान अमरित तुम पीयव।।

रचनाकार - अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर - दुर्ग, छत्तीसगढ़
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

(19)  सरसी छंद- श्री मोहन लाल वर्मा

सत के जोत जलाये हावय, बाबा घासीदास ।
सबो जीव हें एक जगत मा,जेकर मंतर खास ।।

सादा-जीवन अपन बितावव,मानव गा सतनाम।
सबो धरम के आदर भइया,हवय पुण्य के काम ।।

जात-पात अउ छुआछूत ला,मनखे हवे बनाय ।
मनखे हें सब एक बरोबर, बाबा हमर बताय।।

काम-क्रोध अउ लोभ-मोह ला,छोड़व भइया आज ।
नशापान मा झन बूड़व गा,कहिथे संत समाज ।।

सत के अलख जगावव संगी, कहना गुरु के मान ।
सत-मारग मा चलव सदा जी,गढ़व अपन पहिचान ।।

सत्य-अहिंसा मानवता हे,बाबा के संदेश ।
परहित मा सब काम करव जी,टोरव मन के क्लेश ।।

सादा झंडा चिन्हा हावय, सत्यनाम आधार ।
बाबा घासीदास बताइन, जिनगी के सब सार ।।

सत्यनाम के गहना पहिनव, करम हवे भगवान ।
सेवा दीन-दुखी के करलव,अउ नारी-सम्मान ।।

सदाचार जस नइये भइया,जग मा बड़का काम ।
अंतस भीतर अपन बसालव, धरम-करम सतनाम ।।

घर-घर मा बगरावव संगी, शिक्षा के उजियार ।
बाबा घासी के संदेशा, जग मा हावय सार ।।

छंदकार- मोहन लाल वर्मा
पता- ग्राम अल्दा,पो.आ.-तुलसी (मानपुर),
व्हाया-हिरमी, वि.खं.-तिल्दा,जिला-रायपुर
(छत्तीसगढ़ )पिन-493195
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

दोहा कुंडलियाँ छंद-नेमेंद्र कुमार दिन दुःखी के संग मा , खड़े हवे सतनाम। बाबा बइठ गिरौद ले , देख बनावत काम।। घासी बाबा नाम ले , बन जाथे सब काम। जेकर जीवन ज्ञान के , प्रेम भरे हे दाम।। प्रेम भरे हे दाम , भाव जे सत सत होही। सत बानी अनमोल , सुने ते उफला पोही।। गुरु के कर अपमान,लगावव झन खुद फाँसी। भव ले करही पार , हमर गुरु बाबा घासी *।।1।।* मानव मानव एक हे , बाबा देहे ज्ञान। भेद भाव हे जात के , सबके लहू समान।। सबके लहू समान , देह सुग्घर हे जानव। पूजा सेवा भाव , करम सत मनवा मानव।। देखत दुख मा जीव,बनो झन बैरी दानव। छलकत आँसू पोंछ , बनव ये जग के मानव *।।2।।* घूमत जग अब छोड़ चल,बाबा तीरथ धाम। धर ले चोला गोड़ ला,बोलत जय सतनाम।। बोलत जय सतनाम ,बबा के रद्दा धरिहव। मिलही संगी छाँव ,विनय बाबा ले करिहव। तिलक लगालव माथ ,धजा घासी के चूमत। घासी जग आधार , कार हस फोकट घूमत *।।3।।* छंदकार-नेमेन्द्र कुमार गजेन्द्र हल्दी-गुंडरदेही,बालोद मोबा.8225912350
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 दोहा - छंद -रामकली कारे करबो गुरु के बन्दना , निंदा चारी छोड़ । दया मया सब बर धरे ,सत ले रसता जोड़ ।। मनखे मनखे एक हे , कहे बबा हा बोल। हाड़ मांस एके हवय , मिसरी मुख मा घोल ।। महॅगू के बेटा बबा ,अमरौतिन के लाल । हवै गिरौद ग धाम जी , संत पंथ हे चाल ।। जैत खाॅम दीया जला , सेवा राखव भाव । मनखे मनखे एक हो , समता सुमता लाव ।। हिरदय मा गुरु हा बसे , बाबा घासीदास । लोभ मोह अउ क्रोध के ,करदे तन ले नास ।। साधक तपसी गा बनिस , सत मा लागे ध्यान ।। करिन साधना मनवा बर ,ता करथें गुनगान ।। सत्य बात ला बोलबे , ज्ञान सबो के सार । करम बने चल कर इहाॅ , भव हो जाबे पार ।। छंदकार - रामकली कारे बालको नगर कोरबा छत्तीसगढ़
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 : दोहा छंद- उमाकान्त टैगोर हे गुरुघासी तोर मँय, कतका महिमा गांव। जीयत भर ले तोर गुन, कभू लिखे नइ पाँव।।1।। सत् के रद्दा मा बबा, हमला तँय रेंगाय। मनखे-मनखे एक हे, हमला दिए बताय।।2।। अमरौतिन के लाल तँय, हम सब के भगवान। जात-पात हा ढोंग ये, इहू दिए तँय ज्ञान।।3।। तोर बताये राह मा, कतको चलथे आज। अउ कतको ला आज भी, एक्को नइ हे लाज।।4।। हिंसा छोड़े के सबो, करथे नाटक रोज। कुकरी कतको खात हें, बनथे भारी सोज।।5।। बिन दारू मरनी तको, नइ निपटत हे आज। कइसे मँय काला कहँव, भारी आथे लाज।।6।। सादा झंडा सत्य के, आवय बाबा तोर। फहर-फहर फहरत रहय, जुग-जुग चारो ओर।।7।। आज नहीं ता काल तो, मिटही जग के पीर। थोकन हमला आज भी, राखे परही धीर।।8।। छंदकार- उमाकान्त टैगोर कन्हाईबंद, जाँजगीर(छ.ग.)

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
: कुण्डलिया छंद- इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध" सत के जोड़ा खाम मा,फ़हरे झंडा सेत। गुरु घासी के ज्ञान ला,सुनौ लगा के चेत।। सुनौ लगा के चेत,बताये हे गुरु ज्ञानी। सत्य अहिंसा धर्म,सबो के हो जिनगानी।। गजानन्द कविराय,करै बिनती बस अतके। पर सेवा उपकार,सार हावय जी सत के।।1 रंग लहू के एक हे,सबके तन मा लाल। जाति पाति के फेर मा,भेद भाव झन पाल।। भेद भाव झन पाल,टोर दे कुंठा जाला। आवव संत समाज,जपौ सुमता के माला।। गजानन्द के बात,धरौ सब झन सास बहू। घर घर होय उजास,भेद ना हो रंग लहू।।2 अर्थ सुनौ सतनाम के,शब्द हवे ये सार। राह दिखाये एकता,सत दियना ला बार।। सत दियना ला बार,भाव समता के देखे। सर्व धर्म सतनाम,सदा ही सत्य सरेखे।। गजानंद के बात,कभू ना तुम ब्यर्थ गुनौ। महा मंत्र सतनाम,बताये हँव अर्थ सुनौ।।3 इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छ.ग.)

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
: चौपाई छन्द-जय सतनाम(नेमेन्द्र) अमरौतिन के बेटा घासी | सतनामी बर काबा कासी || देत ज्ञान हे सुग्घर धरलव | मान जीव के पहिली करलव || छत्तीसगढ़ म घासी जन्में | होवै हर्षित लोगन मनमें || गुरू ज्ञान के सागर घासी | फूल लगे जे बारह मासी || लहू रंग हे सब के एके | हँस झन जीव ल आँसू देके || जीव मात के पूजा करलव | अंतस भीतर मया ल धरलव || सत के चोला ओढ़ चले हे | बाबा घासी दास भले हे || मनखे सेवा मान बड़े वो | पीर हरत रद्दा म खड़े वो || सत के झंडा हाथ म लेके | बबा चले सब साथ म लेके || जात पात के भेद ल छोड़े | छुवा छूत के बेड़ी तोड़े || छंदकार-नेमेन्द्र कुमार गजेन्द्र हल्दी-गुंडरदेही-बालोद मोबा-8225912350

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
दोहा , कुंडलिया , अउ रोला छंद .मोहन मयारू गुरु चरण बन्दन करौ , होय सुफल सब काज । रद्धा सत्या के धरौ , राखव सतगुरु लाज ।। होत बिहनिया नाम ले , करव सुमरनी तोर । सत्यनाम हिरदे बसे , बगरे चारो ओर ।। बनगे आज गिरौद जी , घासी बाबा धाम । जन्म धरिन जीहा बबा , गूँजय सत्यानाम ।। कर सुमिरन सतनाम के , जाबे भवले पार । गुरु चरन मा मन लगा , नाम हवय जी सार ।। बाबा घासी दास के , महिमा हवय महान । सत्य नाम निज सार हे , जानय सकल जहान ।। पावन धाम गिरौद मा , बाबा ले अवतार । सत्यनाम् गूंजय सदा , जगमा हावय सार । जगमा हावय सार , नाम ला तँय हर जपले । गाले सत्यानाम , पार जी होबे झपले । चरण कुण्ड के धार , बहय जी जइसे सावन । मेला लगथे रोज , धाम गा हावय पावन ।। महँगू के जी पूत , सत्य के रद्धा चलथे । माता अमरौतीन , देख जी दुनिया जलथे । सत्यनाम् हे सार , सबो के सेवा करथे । मानव एक समान , मान जी पीरा हरथे ।। रचनाकार - मयारू मोहन कुमार निषाद
गाँव - लमती , भाटापारा , जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
: कुण्डलिया छंद-संतोष कुमार साहू सत गुरु घासीदास के,आज जयंती खास। सुग्घर सत के ज्ञान हा,पहुँचे सबके पास।। पहुँचे सबके पास,असत के होवय खात्मा। तभे सफल तँय मान,सबो तन मन अउ आत्मा।। सत ही पूजा भक्ति,सबो के ये पक्का ब्रत। वो नोहे इंसान, अगर नइ जाने जे सत।। छंदकार-संतोष कुमार साहू ग्राम-रसेला छुरा,जिला-गरियाबंद छ.ग.
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
कुकुभ छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै। सच्चा मनखे उनमन राहिन,उँखर ज्ञान ला जग गावै।। समता के नित पाठ पढ़ायिन,अबड़ रहिन जी ओ ज्ञानी। गिरौधपुरी म जनम लिहिन जी,नेक संदेश के बानी।। मंहगूदास के राहिन बेटा,अमरौतिन माँ कहलावै। छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।। जात पात के घोर विरोधी,ओखर पढ़लौ सब गाथा । छत्तीसगढ़ म जनम लिये ले,आज अबड़ चमकिस माथा। डरिस नही अंतस मन ले ओ,साहस सबके मन भावै। छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।। बहादुरी के अब्बड़ किस्सा,जप तप ले बनगे ज्ञानी । सत्य प्रेम ला मन म जगाइन,सत्य नाम अमरित बानी। समता के उजियारा करके,अंतस मन जोत जलावै। छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।। छुआछूत ला दूर भगाइन,सरल साधारन ओ प्रानी। छत्तीसगढ़ म अमर नाव हे,आज दिवस ला सब मानी। हिरदे ले परनाम करौ जी,अइसन हीरा नइ आवै। छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।। छंदकार-श्रीमती आशा आजाद पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

अमित के कुण्डिलयाँ सतनामी होथे उही, जौन जपय सतनाम। लोभ लबारी त्याग के, करय सदा सतकाम।। करय सदा सतकाम, बरोबर सब ला मानय। भेदभाव ला लेस, सबो ला एक्के जानय।। कहय 'अमित' करजोर, होय नइ इन खल कामी। सत ला मानय सार, उही होथे सतनामी।। सतनामी सिधवा सुघर, मगन रथें चुपचाप। हुदरँय कोनो हा कहूँ, उँखर फेर इन बाप।। उँखर फेर इन बाप, होय समरथ मा बघवा। गुरुवर के गुनगान, हरँय सत के बड़ अघवा।। कहय अमित करजोर, नीत के यें अनुगामी। सत्यनाम सिरतोन, नाँव जेखर सतनामी।। कन्हैया साहू 'अमित' भाटापारा छत्तीसगढ़

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
दोहा छंद -चित्रा श्रीवास मनखे मनखे एक हे, हवय बबा के बोल। भेदभाव ला छोड़ दे,समता के रस घोल।। अंधविश्वास ला भगा,चलव सत्य के राह। फहरे झंडा साँच के,इही बबा के चाह।। मनखे सेवा ले बड़े ,नइहे कोनो धर्म। इही जगत के सार हे, सबले बड़का कर्म।। बगरे घर घर मा सदा बाबा के संदेश। जुर मिल राहव लोग सब,होही कइसे क्लेश।। हिंसा छोड़े के सदा ,देइन हमला ज्ञान। चलके रद्दा साँच के ,राख बबा के मान।। छंद कार - चित्रा श्रीवास कोरबा 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

: दोहा पोखन लाल जायसवाल बाबा घासीदास जी,राखिन सत के मान। सुनके सत-संदेश ला,मिलिस फेर पहिचान।। सत के अलख जगाय हे,बाबा घासीदास। सत के मारग मा चलन,बाँधे मन मा आस।। नशा नाश के जड़ हरे, मानन गुरु संदेश। नशा छोड़ के आज हम,मेटन अपन कलेश।। काम-क्रोध लालच फँसे,भटके हावय आज। मनखे ला संदेश दे,तारय संत समाज।। मनखे-मनखे एक हे,लेवव सबके शोर। बाबा के संदेश हा,जग-मग करय अँजोर।। चलत पंथ सतनाम के,कतको करय उपाय। पीके दारू बोकरा,कुकरी भारी खाय।। बाबा के संदेश के,मरम जान नइ पाय। चाल चलत अटपट उही,चूना बहुत लगाय।। जनम भूमि हा संत के,हावय तीरथ धाम। राख लाज सतनाम के,काबर हो बदनाम।। छंदकार: पोखन लाल जायसवाल पठारीडीह( पलारी )
जि बलौदाबाजार भाटापारा (छ.ग.)
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

छंदकार-राजकिशोर धिरही दोहा-छंद सुन गुरु घासीदास के,बढ़िया हे संदेश। ज्ञान बतावय रावटी,टारव मन ले क्लेश।। सत्य अहिंसा सार हे,मनखे मनखे एक। हिरदय मा भर ले दया,जात पात झन देख।। पथरा पूजा छोड़ दे,मनखे के कर मान। होथे गहना सत्य हा,बात इही ला जान।। मया करे मा सुख मिलै,कहय सदा संसार।। हिंसा मारग त्याग दे,कोनो ला झन मार। अमरौतिन के लाल के ,होवत जय जय कार। रद्दा हावय सत्य के,तन ला देथे तार।। चला गिरौदपुरी चली,गूँजत हे सतनाम। बाबा घासीदास के,हावय सुग्घर धाम।। छंदकार-राजकिशोर धिरही तिलई,जांजगीर छत्तीसगढ़

20 comments:

  1. संत शिरोमणि गुरु घासीदास जी ला सादर पायलगी।
    सादर नमन गुरुदेव सुग्घर उदिम खातिर।

    ReplyDelete
  2. सुग्घर संग्रह!जय जय गुरुदेव

    ReplyDelete
  3. सन्त शिरोमणि गुरु बाबा घासीदास जी के जयंती विशेष पर हमर छंद परिवार के अनमोल छंद रचना,सबो छंदकार मन ला सादर सादर बधाई।

    ReplyDelete
  4. सफके रचना बहुत सुघ्घर हे। सबझन ला गाड़ा गाड़ा बधाई

    माटी

    ReplyDelete
  5. सतनाम पंथ के प्रवर्तक संत श्री घासीदास जी ल सादर नमन । बढ़िया संग्रह गुरु देव।

    ReplyDelete
  6. संत गुरु बाबा घासीदास के संदेश आधारित विषय मा छंद के छ परिवार के साधक मन के अनमोल छंद संग्रह हे,गुरुदेव ।सादर नमन ।सबो छंद साधक मन ला हार्दिक बधाई अउ शुभकामना ।

    ReplyDelete
  7. बहुत सुंदर संकलन, सबला संत गुरु घासीदास बाबा जयंती के हार्दिक बधाई अउ शुभकामना।

    ReplyDelete
  8. वाह्ह्ह वाह्ह्ह। बहुत सुंदर संग्रह बाबा गुरु घासीदास जी के जयंती के उपलक्ष्य में।

    ReplyDelete
  9. वाह्ह्ह वाह्ह्ह। बहुत सुंदर संग्रह बाबा गुरु घासीदास जी के जयंती के उपलक्ष्य में।

    ReplyDelete
  10. जय गुरुघासीदास बाबा🙏🙏🙏💐
    सुंदर संकलन आज के शुभ दिन मा💐💐🙏

    ReplyDelete
  11. जय हो गुरु घासीदास बाबा । जम्मों आदरणीय छंदकार मन ला सादर प्रणाम

    ReplyDelete
  12. सबो साधक भाई बहिनी मन ला गुरु घासीदास के
    सुघ्घर विशेषांक बर बहुत बहुत बधाई

    ReplyDelete
  13. शानदार छंद के जानदार कलेक्शन गुरुदेव

    ReplyDelete
  14. शानदार छंद के जानदार कलेक्शन गुरुदेव

    ReplyDelete
  15. बढ़िया संकलन गुरुदेव

    ReplyDelete
  16. साहेब सतनाम,
    सबो भाई मन ल

    ReplyDelete
  17. ITS VERY INNOVATIVE CHAND RACHANA . IT SPREADING ALL OVER COUNTRY NOTHING BOOKMARK

    ReplyDelete
  18. बहुत सुन्दर रचना है

    ReplyDelete