Wednesday, September 6, 2017

मत्तगयन्द सवैया - श्रीमती रश्मि गुप्ता

मत्तगयन्द सवैया - श्रीमती रश्मि गुप्ता


देखय रूप ल मोहन के जब, बाल सखा पुलकै अति भारी।
गोप गुवालिन देखय नाचय, मोहय मोहन जावय वारी।
फूल बरोबर हाथ सखी मुख, सुंदर आखिन हे कजरारी।
सूरज चाँद लगे नख पाँव के, मोह लिये सब देव मुरारी।


रचनाकार - श्रीमती रश्मि गुप्ता
बिलासपुर, छत्तीसगढ़

29 comments:

  1. बहुतेच बढ़िया मत्तगयन्द सवैया दीदी जी। बहुत बहुत बधाई हे।

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  2. वाह्ह वाह्ह्ह्। बाल कृष्ण के मनमोहक रूप के मत्तगयन्द सवैया मा लाजवाब चित्रण।
    रश्मि गुप्ता जी ला हार्दिक बधाई।

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  3. बहुँत सुंदर सवैया दीदी जी

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  4. बहुँत सुंदर सवैया दीदी जी

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  5. वाह दीदी कृष्ण बाल रूप के सुग्घर वर्णन

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  6. बहुत सुघ्घर सवैया हे रश्मि बहन
    बधाई हो

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  7. बढिया सवैया लिखे हस, रश्मि !

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  8. बहुत सुग्घर रचना दीदी।सादर बधाई

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  9. बहुत सुग्घर रचना दीदी।सादर बधाई

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  10. बहुत सुघ्घर रचना रश्मि बहिनी बधाई

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  11. बहुत सुघ्घर रचना रश्मि बहिनी बधाई

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  12. बहुत सुग्घर मत्तगयंद सवैया,रश्मि दीदी। बहुत बहुत बधाई।

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  13. सुग्घर सवैया बहन बधाई

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  14. बड़ सुग्घर सवैया। बधाई

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  15. एक से बढ़के एक...वाह वाह वाह...
    मजा आगे हमर रश्मि बहिनी के रचना पढ़के..
    गाड़ा गाड़ा बधाई बहिनी...

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    1. धन्यवाद सूर्यकान्त भैया

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