बाढ़त हे अश्लीलता-सार छंद
सोसल मिडिया मा मनखें मन, फूहड़ता बगरावै।
नर होवै चाहे हो नारी, सबझन हँस इतरावै।।
मनखें मन बर होगे लगथे, गारी गिल्ला ठट्ठा।
सेलिब्रिटी हवै तउने मन, बैठारत हें भट्ठा।।
कतको देखत मुहुँ लुकावै, ता कतको ला भावै।
सोसल मिडिया मा मनखें मन, फूहड़ता बगरावै।।
डर नइ हे कोनो ना कखरो, करत हवैं मनमानी।
सबे वाइरल होए खातिर, होरा भूंजँय छानी।।
पढ़े लिखे जन आँख मूंद के, भेड़ी असन झपावै।
सोसल मिडिया मा मनखें मन, फूहड़ता बगरावै।।
सबके हाथ मा हवै मोबाइल, का सियान का लइका।
बाढ़त फूहड़ता मा उघरै, लोक लाज के फइका।।
सजा होय अइसन मनखें ला, सबक सीख सब जावै।
सोसल मिडिया मा मनखें मन, फूहड़ता बगरावै।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
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