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Sunday, September 13, 2026

तह विकास के-हाकलि छंद

 तह विकास के-हाकलि छंद


तह विकास के पोला हे।

सब खुँट विष के घोला हे।।

बम बारुद गन गोला हे।

सुख मासा अउ तोला हे।।


बरत गाँव घर टोला हे।

उसलत बारी कोला हे।।

गिरे फसल मा ओला हे।

खतरा तोला मोला हे।।


नेता मन बड़बोला हें।

जनता निच्चट भोला हें।।

नश्वर माटी चोला हे।

तब ले नखरा सोला हे।।


इक देखावत रोला हे।

घर भीतर हिंडोला हे।।

इक के हाथ फफोला हे।

चिरहा खीसा झोला हे।।


सत के निकलत डोला हे।

संगी सगा सपोला हे।।

मोला मोला मोला हे।

बरत जिया मा होला हे।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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