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Saturday, September 19, 2026

श्री गणेश स्तुति

 श्री गणेश स्तुति


श्री गणेश गणपति,लम्बोदर प्रभु ,सूरवीर तँय, महा बला I

गौरी सुत नंदन,सिद्धि विनायक,गजब दिखाये,ललित कला I 

देवों के तँय हा,देव बुद्धिप्रिय,सुमुख भुवनपति,नाथ हरौ I

हे विध्नविनाशक,विद्यावारिधि,विकट चार भुज,हाथ हरौ II


हे शुभगुणकानन,बुद्धिविधाता,मूषक वाहन,देव तहीं I 

हे विश्वाराजा,मात पिता के,सेवक कीर्ति,नेंव तहीं I

हे कपिल कृपाकर, विघने हरता,माता तोरे,पारबती I 

हे वक्रतुंड प्रभु,एकदंत तँय,सबले जादा,हवय मती II  


गजमुख गणनायक,वरदविनायक,नमस्थेतु प्रभु,धरे गदा I 

हे मंगलमूरति,ओमकार जप,जय हो जय हो,तोर सदा I 

एकाक्षर श्वेता,शशिवरणम शुभ,रिद्धि सिद्धि के,नाथ तहीं I 

हे यज्ञकाय प्रभु,भक्तन मन ला,देथस वर अउ,साथ तहींII


जे योगाधिप प्रभु,तरुण यशस्कर,विघ्नराज के,ध्यान धरै I

भागय विपदा हा,धन बल बाँढ़य,भव के सागर,पार करै I

हे शान्ति स्वरूपा,गुण सर्वात्मन,पुण्य काज मा,साथ तहीं I

प्रथमेश्वर स्वामी,शुभ कारज के,वर देवइया,हाथ तहीं II


हे शूपकर्ण प्रभु,दीनन के दुख,भक्ति धार के,रंग हरौ I

हव ज्ञान जोत के,राह दिखइया,गणराजा नित,संग हरौ I

धीरज गहना ये,कहव सदा प्रभु,सुघर चन्द्र के,भाल हरौ I

हे धूम्रवर्ण प्रभु,गणाध्यक्ष तँय,बइरी बर तो,काल हरौ II

 

हे बुद्धिनाथ तँय,तोर कृपा ले,सबके पूरन,काज बने I

लड्डू मोदक के,परसादी ले,मन शरीर ला,साज बने I 

दूर्जा दैमांतुर,लम्बकर्ण प्रभु,हरथस सबके,पीर बने I  

हे अमित अखूरथ,तोला प्रिय हे,मोदक लडुवन,खीर बने II  


हे गुणिन मनोमय,मृत्युंजय प्रभु,विनती हे कर,जोर करौं I

हे रक्त रूद्रप्रिय,माथ नँवाके,भाव-भक्ति ला,तोर करौं I

देव स्क्न्दपूर्वज,महाकाय नित,रक्षा खातिर,खाम बनौ I

देवान्तकनाशक,भटके मन मा,मूरत बनके,धाम बनौ II


हे प्रमोदाय सुन,मँय अगियानी,निचट अपड़ हँव,ज्ञान दवौ I        

हे भीम चतुर्भुज,क्षेमकरी प्रभु,गजनानेटी,ध्यान दवौ I                        

हे मुक्तिदया कृति,सिद्धिप्रिया तँय,बाधा विपदा,टार सदा I

हे शुबान सुमुखा,पुरुष नंदना,बनथस खेवन, हार सदा II 


हे विश्वराज प्रभु,तोर कृपा ले, बिगड़े सबके,भाग बने I

क्षिप्रा विघनेश्वर,गजा हंभवी,ज्ञान जोत के,पाग बने I 

यशवासिन कविशा,हाथ जोर के,महिमा तोरे,गाँव सदा I

हे गुनिना कपिला,तोर कृपा के,मिलत रहय नित,छाँव सदा II


हे देव गजानन,हे अवनीशा,सबके हरथव,क्लेश इहाँ I

हे यशस्करम प्रभु,पनपे झन तो,कखरोंअंतस,द्वेष इहाँ I

पइयाँ लागँव मँय,नाथ उबारव,सबले बड़का,देव तहीं I 

गिरजा के लाला,दीन दयाला,भक्तन के सुध,लेव तहीं II


विजेन्द्र कुमार वर्मा 

नगरगाँव (धरसीवां)

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