दुर्मिल सवैया
चुटकी मुँदरी फुँदरी पहुँची, ककनी नक बेसर घात हवै।
सुतिया गर शोभत हार सखी, तरकी नथली इठलात हवै। ।
नग साज सजे बिजुरी जइसे,पइरी घुँघरू झनकात हवै।
गजरा फभथे घनकेश सदा, अखियाँ कजरा ममहात हवै। ।
रोला छंद
टोंड़ा पइरी पाँव , कमर करधनिया साजे।
मया पिरित के छाँव, चटक के बिछिया बाजे। ।
कटहर लच्छा शान, कान मा लुरकी सोहे।
लक-लक चमके हार , देख के मन ला मोंहे। ।
तिरिया के सिंगार, गजब मनुहारी होथे।
इँकरे ले घर द्वार , सुघर फुलवारी होथे ।।
सोना चाँदी छोड़ , धनी अनमोल खजाना।
रहय सदा संजोग , मांघ सिन्दूर सजाना। ।
सुर्रा सूता ढार, फभै सुग्घर नारी ला।
करथे मया दुलार, सजाथे घर बारी ला।।
कतका करँव बखान, फूल कयना हे मनके।
मधुर-मधुर व्यवहार, इही हे गहना तनके। ।
सुमित्रा शिशिर
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