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Saturday, September 19, 2026

दुर्मिल सवैया

 दुर्मिल सवैया 


चुटकी मुँदरी फुँदरी पहुँची, ककनी नक बेसर घात हवै। 

सुतिया गर शोभत हार सखी, तरकी नथली इठलात हवै। ।

नग साज सजे बिजुरी जइसे,पइरी घुँघरू झनकात हवै। 

गजरा फभथे घनकेश सदा, अखियाँ कजरा ममहात हवै। ।


रोला छंद 


टोंड़ा पइरी पाँव , कमर करधनिया साजे। 

मया पिरित के छाँव, चटक के बिछिया बाजे। ।

कटहर लच्छा शान,  कान मा लुरकी सोहे। 

लक-लक चमके हार , देख के मन ला मोंहे। ।


तिरिया के सिंगार,  गजब मनुहारी होथे। 

इँकरे ले घर द्वार  , सुघर फुलवारी होथे ।।

सोना चाँदी छोड़  , धनी अनमोल खजाना। 

रहय सदा संजोग  , मांघ सिन्दूर सजाना। ।


सुर्रा सूता ढार,  फभै सुग्घर नारी ला। 

करथे मया दुलार,  सजाथे घर बारी ला।।

कतका करँव बखान, फूल कयना हे मनके। 

मधुर-मधुर व्यवहार, इही हे गहना तनके। ।



सुमित्रा शिशिर

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