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Saturday, September 19, 2026

चउथ के चाँद- लावणी छंद

 चउथ के चाँद- लावणी छंद


घूप दीप आगर इत्तर मा, सजे चउथ के थाली हे।

चाँद निहारत चाँद खड़े हे, चमकत बिंदिया बाली हे।।


भाव भजन व्रत जप तप गूंजे, नाँव सजन के हे मुख मा।

माँगय वर माता करवा ले, बीतय जिनगी नित सुख मा।।

लाली लुगरा लाली लहँगा, महुर मेंहदी लाली हे।

चाँद निहारत चाँद खड़े हे, चमकत बिंदिया बाली हे।।


जप तप देख अशीष सुखी नित, देय विधाता बिन बोले।

जनमो जनम रहय रिस्ता हा, नेव ठिहा के झन डोले।।

हवय सजाना कइसे बगिया, जाने जउने माली हे।

चाँद निहारत चाँद खड़े हे, चमकत बिंदिया बाली हे।।


करवा चउथ उपास रहइया, बाढ़त हावय सब कोती।

मया पिरित मा चहकय डेरा, बरे खुशी सुख के जोती।।

टिके आस मा हे सरि दुनिया, बिन आसा जग खाली हे।

चाँद निहारत चाँद खड़े हे, चमकत बिंदिया बाली हे।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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