Followers

Wednesday, October 2, 2019

अमृत ध्वनि छंद-द्वारिका प्रसाद लहरे

अमृत ध्वनि छंद-द्वारिका प्रसाद लहरे

सादर जय जोहार हे,गुरू चरण मा मोर।
देवव नित आशीष ला,बिनती हे कर जोर।
बिनती हे कर,जोर गुरू जी,माथ नवावँव।
चरण कमल के,दास बनालौ,गुन ला गावँव।
सेवा करहूँ, रोज गुरू के,करहूँ  आदर।
चरण कमल मा,फूल चढ़ावत,
वंदन सादर।।1

आवँव बेटा वीर जी,महिनत हे बल मोर।
दया मया ला बाँट के,लेथँव सबके सोर।
लेथँव सबके,सोर देश के,गुन ला गावँव।
मया बाँध के,सुमता सब मा,मैं हाँ लावँव।
भारत भुँइयाँ,सोन चिरइया,हरदम पावँव।
जनम जनम बर,बेटा बनके,मैं हाँ आवँव।।2

धरती दाई मोर तैं,बेटा मैंहा तोर।
भरय कटोरा धान के,विनती हे करजोर।
बिनती हे करजोर माथ ला,मोर नवावँव।
निस दिन सब बर,जाँगर टोरत, अन उपजावँव।
खेत खार मा,धान उगाहूँ,रहय न परती।
तिहीं जीव के,पालनहारी,दाई धरती।।3

बोंवय धान किसान जी,निस दिन करके काम।
अन उपजावँय पेट बर,खेत खार हा धाम।
खेत खार हा,धाम आय जी,गुन ला गावँय।
गिरे पछीना,करँय मेहनत,अन उपजावँय।
माटी भुँइयाँ,अन उपजइया,नइ तो सोवय।
चना गहूँ अउ,धान खेत मा,सब बर बोंवय।।4

छंदकार-द्वारिका प्रसाद लहरे बायपास रोड़ कवर्धा (कबीरधाम) छत्तीसगढ़