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Monday, May 7, 2018

चौपई छंद :- - श्री जगदीश "हीरा" साहू

*ट्रैफिक सिग्नल देख के*

संगी सिरतों कहना मान। हवय कीमती सबके जान।
गाड़ी चलत हवय अनलेख। रेंगव ट्रैफिक सिग्नल देख।।1।।

हरा कहत हे जल्दी जाव। कहय पींवरा धीरे आव।।
लाल कहय तुरते रुक जाव। जानव येला उमर बढ़ाव।।2।।

डेरी बाजू रेंगत जाव। कभू कहूँ धोखा नइ पाव।।
सड़क नियम ला जानव आज। इही हवय गा सुख के राज।।3।।

करना हवय सड़क ले पार। पहिली दाँया देखव यार।।
फेर देख लव बाँया ओर। आगू देखव उहाँ अगोर।।4।।

खाली हे जब दूनों छोर। पार करव जी कोरे-कोर।।
रस्ता देखत हे परिवार। इही बात हे जग मा सार।।5।।

चढ़व साइकिल करके चेक। राहय जेमा पुख्ता ब्रेक।
अलवा-जलवा ला दव फेंक। नइते राखव घर मा छेंक।।6।।

गाड़ी झन चलावव रेस। मारव झन गा ओमा टेस।।
बस दूये झन चढ़के जाव। जिनगी भर जी मजा उड़ाव।।7।।

हेलमेट जे राहय ठीक। रोज लगावव होवय नीक।।
करव कभू झन ओवरटेक। झनकर जल्दी कभू अतेक।।8।।

दारू पीके जेन चलाय। दुर्घटना ला अपन बलाय।।
जे गाड़ी मा करथे होड़। घर बइठय वो हड्डी तोड़।।9।।

मानुस जीवन हे अनमोल। रेंगव सबझन आँखी खोल।।
दिये हवय सबला भगवान। अपन बरोबर सबला मान।।10।।

रचनाकार - श्री जगदीश "हीरा" साहू
कड़ार (भाटापारा)
छत्तीसगढ़