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Saturday, September 16, 2017

चौपाई छंद श्री कन्हैया साहू "अमित"

चौपाई  छंद श्री कन्हैया साहू "अमित"

पहिरे सजनी सुग्घर गहना।
बइठे जोहत अपने सजना।।
घर के अँगना द्वार मुँहाटी।
कोरे गाँथे पारे पाटी।।

बेनी बाँधे लाली टोपा।
खोंचे कीलिप डारे खोपा।।
बक्कल फीता फुँदरा फुँदरी।
फूलकुँवर फुलबासन सुँदरी।।

कुमकुम बिन्दी सेन्दुर टिकली।
माँथ माँगमोती हे असली।।
रगरग दमदम दमकै माथा।
सुनव अमित ले गहना गाथा।।

लौंग नाक नग नथली मोती।
फुली खुँटी दीया सुरहोती।।
कान खींनवा लटकन तरकी।
बारी बाला झुमका लुरकी।।

गर मा चैन संकरी पुतरी।
गठुला गजरा गूँथे सुतरी।।
सिरतो सूँता सूर्रा सुतिया।
भुलकापइसा रेशम रुपिया।

बहुँटा पहुँची चूरी ककनी।
बाहाँ मरुआ पहिरे सजनी।।
कङा नागमोरी हा अँइठे।
सज धज के अब गोरी बइठे।।

कुचीटंगनी रेसम करधन।
ए सब हावय कनिहा लटकन।।
लाल पोलखा लुगरा साया।
गहना गुरिया फभथे काया।।

सोन मुंदरी चाँदी छल्ला।
पहिर अंगरी झन कर हल्ला।।
छल्ला लोहा तांबा पीतल।
सजथे तन होथे मन सीतल।।

पाँव पैरपट्टी अउ पैरी।
बिन जोंही लागे सब बैरी।।
साँटी टोंड़ा बिछिया लच्छा।
गोड़ सवाँगा सबले अच्छा।।

लाल आलता माहुर लाली।
हाँथ मेंहदी मा खुसहाली।।
लाज असल हे नारी गहना।
सिरतो एखर का हे कहना।।

रचनाकार - श्री कन्हैया साहू "अमित"
भाटापारा, छत्तीसगढ़