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Tuesday, September 5, 2017

श्री मोहनलाल वर्मा के दोहा

श्री मोहनलाल वर्मा के दोहा

छंद खजाना के संकलन मा सुधार   बर दोहा----

(1)
मोहन हाबय नाँव गा,रहिथँव अल्दा गाँव।
हे किसान मोरे ददा,बड़का बेटा आँव ।।

(2)
रइपुर तिल्दा छोर मा,हाबय अल्दा गाँव।
जनमभूमि परिचय बने,मोहन वर्मा नाँव  ।।

(3)
हरियर हरियर खेत मा,धरे मया के तान।
बादर ठोंकय ढोल ला,पवन करय गुणगान  ।।

(4)
बाँटा बाँटा मा तको,खेती कमती होय ।
मनखे होगे कोढ़िया,धरती मइयाँ रोय ।।

(5)
जिहाँ सुमत के पाग हे,सरग उहाँ बन जाय।
जेकर अँगना हे मया,उहाँ राम जी आय ।।

(6)
फैशन के जुग मा लगे,नशा पान के रोग ।
घुरवा  जिनगी ला करँय,मदिरा पी के लोग  ।।

(7)
कलजुग विष दारू बने, जिनगी बिरथा होय।
तन धन कुछु बाँचय नहीं,मूँड़ धरे तब रोय ।।

(8)
कुसुम अमारी चेंच हे,पटवा अउ बोहार ।
सरसो भाजी निक लगे,चिटिक मही ला डार ।।

(9)
बथुवा भाजी खार के,खाय नहीं पछताय  ।
द्रोपति भइया कृष्ण ला,भाजी म हे  बनाय  ।।

(10)
कांदा भाजी राँध तँय , सुक्खा बोइर डार ।
नून डार कमती सहीं, होवय झन सक्खार  ।।

(11)
तिवरा भाजी राँध तँय, भाँटा मा फदकाय।
मिर्चा चटनी पीस दे,मोहन मन ललचाय  । ।

(12)
अमली के कुरमा घलो,रहिथे अमसुर स्वाद।
राँध गोंदली संग मा ,होवय झन बरबाद  ।।

रचनाकार - मोहनलाल वर्मा
ग्राम अल्दा, पोस्ट - तुलसी मानपुर, तहसील - तिल्दा, जिला -रायपुर
छत्तीसगढ़